धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन ऐसे पराक्रमी एवं अजेय श्रीकृष्ण को जीतने की आशा रखता है। वह दुष्टात्मा सदैव उनका अनिष्ट करने की ही सोचता है, किन्तु हमको देखकर प्रभु उसके अपराध को सहन करते रहते हैं ॥ 88॥
‘Dhritarashtra's son Duryodhan hopes to conquer such a mighty and invincible Sri Krishna. That evil soul always thinks of harming him, but looking at us, the Lord continues to tolerate his crime. ॥ 88॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥