श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  5.48.77 
अयं स्म युद्धे मन्यतेऽन्यैरजेयं
तमेकलव्यं नाम निषादराजम्।
वेगेनैव शैलमभिहत्य जम्भ:
शेते स कृष्णेन हत: परासु:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
ये भगवान श्रीकृष्ण उस निषादराज एकलव्य को सदैव युद्ध के लिए ललकारते थे, जो दूसरों के लिए अजेय था; परंतु श्रीकृष्ण के हाथ से मारा जाने पर वह प्राणहीन हो गया और रणशय्या पर सदा के लिए सो रहा है, जैसे स्वयं जम्भ नामक राक्षस पर्वत पर प्रहार करने पर प्राणहीन होकर महानिद्रा में लीन हो गया था॥77॥
 
This Lord Shri Krishna always challenged that Nishadraj Ekalavya for war, who was invincible to others; But after being killed by the hand of Shri Krishna, he became lifeless and is sleeping forever in the battle bed, just like the demon named Jambh himself became lifeless after striking the mountain and got immersed in great sleep. 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)