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mahabharat 5.48.70: जिस मनुष्य की विजय का स्वागत भगवान श्रीकृष्ण बिना युद्ध किए ही मन में कर लेते हैं, वह अपने समस्त शत्रुओं को परास्त कर देता है, चाहे वे इन्द्र आदि देवता ही क्यों न हों। फिर मनुष्य शत्रुओं को क्या चिंता रहती है?॥ 70॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  5.48.70 
अयुद्धॺमानो मनसापि यस्य
जयं कृष्ण: पुरुषस्याभिनन्देत्।
एवं सर्वान् स व्यतीयादमित्रान्
सेन्द्रान् देवान् मानुषे नास्ति चिन्ता॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जिस मनुष्य की विजय का स्वागत भगवान श्रीकृष्ण बिना युद्ध किए ही मन में कर लेते हैं, वह अपने समस्त शत्रुओं को परास्त कर देता है, चाहे वे इन्द्र आदि देवता ही क्यों न हों। फिर मनुष्य शत्रुओं को क्या चिंता रहती है?॥ 70॥
 
The person whose victory Lord Krishna welcomes even in his mind without fighting, defeats all his enemies, even if they are gods like Indra etc. Then what is the worry for human enemies?॥ 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)