श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  5.48.60 
पदातिसंघान् रथसंघान् समन्ताद्
ह्यात्तानन: काल इवाततेषु:।
प्रणोत्स्यामि ज्वलितैर्बाणवर्षै:
शत्रूंस्तदा तप्स्यति मन्दबुद्धि:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
जब मैं मृत्यु के समान मुख खोले हुए खड़ा होकर निरन्तर बाणों की वर्षा करता हुआ अपने प्रज्वलित बाणों द्वारा शत्रुओं के पैदलों और रथियों के समूहों का विनाश करने लगूँगा, तब मंदबुद्धि दुर्योधन अत्यन्त व्याकुल हो उठेगा ॥ 60॥
 
When I, like Death standing with mouth wide open and raining arrows uninterruptedly, will start destroying the hordes of enemy infantry and charioteers with my blazing arrows, then the dull-witted Duryodhana will be very distressed. ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)