श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.48.56 
यदा मन्द: परबाणान् विमुक्तान्
ममेषुभिर्ह्रियमाणान् प्रतीपम्।
तिर्यग्विध्याच्छिद्यमानान् पृषत्कै-
स्तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
मेरे बाण युद्ध में अन्य योद्धाओं के बाणों को चोट पहुँचाकर उन्हें पीछे हटा देंगे। साथ ही, मेरे अन्य बाण शत्रुओं के अहंकाररूपी बाणों को भी छेदकर उनके टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। जब मंदबुद्धि दुर्योधन यह सब देखेगा, तो उसे युद्ध आरम्भ करने पर बड़ा पश्चाताप होगा॥ 56॥
 
‘My arrows will hit the arrows of other warriors in the war and will send them back. Also, my other arrows will pierce the enemy's arrows with their arrows of arrogance and break them into pieces. When the dull-witted Duryodhan will see all this, he will feel great remorse for starting the war.॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)