श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.48.51 
यदा रथं हेममणिप्रकाशं
श्वेताश्वयुक्तं वानरकेतुमुग्रम्।
द्रष्टा ममाप्यास्थितं केशवेन
तदा तप्स्यत्यकृतात्मा स मन्द:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
जब कृतघ्न और मंदबुद्धि दुर्योधन मेरे उस भयंकर रथ को देखेगा जो सोने और रत्नों से चमकता हुआ है, जिसे चार श्वेत घोड़े खींचते हैं, जिस पर वानर ध्वज लहराता है और जिस पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण सारथी बनकर बैठे हैं, तब वह हृदय में व्याकुल हो उठेगा॥ 51॥
 
When the ungrateful and dull-witted Duryodhana sees my fearsome chariot glittering with gold and precious stones, drawn by four white horses, with a monkey flag fluttering on it, and Lord Krishna himself seated on it acting as the charioteer, he will become distressed in his heart. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)