श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.48.47 
यदा धृतिं कुरुते योत्स्यमान:
स दीर्घबाहुर्दृढधन्वा महात्मा।
सिंहस्येव गन्धमाघ्राय गाव:
संचेष्टन्ते शत्रवोऽस्माद् रणाग्रे॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
जब महाबली सात्यकि लम्बी भुजाओं और सुदृढ़ धनुष के साथ युद्धभूमि में डटे रहते हैं, तब जैसे सिंह की गंध पाकर गौएँ इधर-उधर भाग जाती हैं, उसी प्रकार युद्धभूमि के मुहाने पर उनके पास आते ही शत्रुगण तुरन्त भाग जाते हैं ॥ 47॥
 
When the great and powerful Satyaki, with long arms and strong bow, stands firm on the battlefield, just as the cows flee here and there on smelling the lion, similarly the enemies, on coming near him at the mouth of the battle-field, immediately run away. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)