Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.48.45: शिनि के पौत्र महारथी सात्यकि चार हाथ लम्बा धनुष धारण करते हैं। उनकी छाती चौड़ी और भुजाएँ बड़ी हैं। वे अद्वितीय योद्धा हैं और युद्ध में शत्रुओं का संहार करते हैं। वे उत्तम अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता हैं। वे निर्भय और शस्त्रविद्या में निपुण हैं॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.48.45 
महोरस्को दीर्घबाहु: प्रमाथी
युद्धेऽद्वितीय: परमास्त्रवेदी।
शिनेर्नप्ता तालमात्रायुधोऽयं
महारथो वीतभय: कृतास्त्र:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
शिनि के पौत्र महारथी सात्यकि चार हाथ लम्बा धनुष धारण करते हैं। उनकी छाती चौड़ी और भुजाएँ बड़ी हैं। वे अद्वितीय योद्धा हैं और युद्ध में शत्रुओं का संहार करते हैं। वे उत्तम अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता हैं। वे निर्भय और शस्त्रविद्या में निपुण हैं॥ 45॥
 
Maharathi Satyaki, grandson of Shini, carries a bow four hands long. His chest is broad and arms are large. He is a matchless warrior and churns his enemies in battle. He knows the best weapons. He is fearless and an expert in the art of weapons.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)