श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.48.42 
यदा स सेनापतिरप्रमेय:
परामृद्नन्निषुभिर्धार्तराष्ट्रान्।
द्रोणं रणे शत्रुसहोऽभियाता
तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का सामना करने में समर्थ अनन्त बलवान सेनापति धृष्टद्युम्न जब अपने बाणों से धृतराष्ट्र के पुत्रों को कुचलते हुए द्रोण पर आक्रमण करेंगे, तब युद्ध का परिणाम सोचकर दुर्योधन को बहुत पश्चाताप होगा ॥ 42॥
 
When Dhrishtadyumna, the infinitely powerful commander capable of facing the enemies, will attack Drona, crushing the sons of Dhritarashtra with his arrows, then Duryodhan will regret a lot thinking about the outcome of the war. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)