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mahabharat 5.48.40: जब शिखण्डी अपने रथ की रक्षा के साधनों से सुसज्जित होकर अपने दिव्य घोड़ों के द्वारा रथियों को चुन-चुनकर मार डालेगा और रथियों के समूहों को कुचल देगा, तथा रथ पर बैठे हुए भीष्म पर आक्रमण करेगा, तब दुर्योधन को युद्ध आरम्भ करने पर बड़ा पश्चाताप होगा ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 5.48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.48.40 
यदा शिखण्डी रथिन: प्रचिन्वन्
भीष्मं रथेनाभियाता वरूथी।
दिव्यैर्हयैरवमृद्नन् रथौघां-
स्तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जब शिखण्डी अपने रथ की रक्षा के साधनों से सुसज्जित होकर अपने दिव्य घोड़ों के द्वारा रथियों को चुन-चुनकर मार डालेगा और रथियों के समूहों को कुचल देगा, तथा रथ पर बैठे हुए भीष्म पर आक्रमण करेगा, तब दुर्योधन को युद्ध आरम्भ करने पर बड़ा पश्चाताप होगा ॥40॥
 
When Shikhandi, equipped with the means to protect his chariot, will selectively kill the charioteers and trample the groups of charioteers with the help of his divine horses, and will attack Bhishma while seated on his chariot, then Duryodhana will feel great remorse for having started the war. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)