श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.48.36 
यदा कृतास्त्रो द्रुपद: प्रचिन्वन्
शिरांसि यूनां समरे रथस्थ:।
क्रुद्ध: शरैश्छेत्स्यति चापमुक्तै-
स्तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जब शस्त्रविद्या में निपुण राजा द्रुपद कुपित होकर अपने रथ पर बैठकर युद्धस्थल में अपने धनुष से छोड़े हुए बाणों द्वारा अपने विरोधियों के युवकों के सिर चुन-चुनकर काटने लगेंगे, तब दुर्योधन को इस युद्ध पर बड़ा खेद होगा॥ 36॥
 
When King Drupada, who is adept in the art of weapons, becomes enraged and sitting on his chariot, begins to select and cut off the heads of the young men of his opponents in the battlefield with arrows shot from his bow, then Duryodhana will deeply regret this war.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)