श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.48.34 
प्रभद्रका: शीघ्रतरा युवानो
विशारदा: सिंहसमानवीर्या:।
यदा क्षेप्तारो धार्तराष्ट्रान् ससैन्यां-
स्तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जब प्रभद्रक देश के शस्त्र चलाने में निपुण, युद्ध में निपुण और सिंह के समान वीर युवक सेना सहित धृतराष्ट्र के पुत्रों को मार डालेंगे, तब दुर्योधन को यह सोचकर बहुत पश्चाताप होगा कि मैंने युद्ध क्यों आरम्भ किया॥ 34॥
 
When the young men of Prabhadraka country, who are adept in handling weapons, experts in war and as brave as lions, will kill the sons of Dhritarashtra along with their army, then Duryodhana will feel very remorseful thinking why he started the war.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)