श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.48.16 
यदा द्रष्टा भीमसेनं रथस्थं
गदाहस्तं क्रोधविषं वमन्तम्।
अमर्षणं पाण्डवं भीमवेगं
तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब दुर्योधन भयंकर क्रोध से भरे पाण्डवपुत्र भीमसेन को हाथ में गदा लिए रथ पर बैठे हुए क्रोध में विष उगलते हुए देखेगा, तब उसे युद्ध के परिणाम को सोचकर बड़ा पश्चाताप होगा॥16॥
 
When Duryodhana sees the terrifyingly resentful Bhimasena, son of Pandava, sitting on his chariot with mace in his hand, spewing venom in anger, he will have to feel great remorse thinking about the consequences of the war.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)