श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.48.14 
यदा ज्येष्ठ: पाण्डव: संशितात्मा
क्रोधं यत्तं वर्षपूगान् सुघोरम्।
अवस्रष्टा कुरुषूद्‍वृत्तचेता-
स्तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
परंतु जब ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिर, जिन्होंने अपने मन को शुद्ध और वश में रखा है, उत्तेजित होकर अपना भयंकर क्रोध, जिसे उन्होंने बहुत वर्षों से दबा रखा था, कौरवों पर उतारेंगे, तब जो भयंकर युद्ध होगा, उसे देखकर दुर्योधन को बहुत खेद होगा ॥14॥
 
But when the eldest Pandava Yudhishthira, who has kept his mind pure and controlled, becomes agitated and unleashes his terrible anger, which he has suppressed for many years, on the Kauravas, the terrible battle that will ensue will make Duryodhana regret it. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)