श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 48: संजयका कौरवसभामें अर्जुनका संदेश सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.48.10 
तैश्चेद् योद्‍धुं मन्यते धार्तराष्ट्रो
निर्वृत्तोऽर्थ:सकल:पाण्डवानाम्।
मा तत् कार्षी: पाण्डवस्यार्थहेतो-
रुपैहि युद्धं यदि मन्यसे त्वम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यदि दुर्योधन चाहता है कि कौरव इन समस्त शूरवीरों के साथ युद्ध करें, तो ठीक है, इससे पाण्डवों की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी। तुम्हें केवल पाण्डवों के हित के लिए संधि करने अथवा आधा राज्य प्राप्त करने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में यदि तुम उचित समझो, तो उससे कहो - 'दुर्योधन! तुम्हें युद्धभूमि में प्रवेश करना चाहिए।॥10॥
 
If Duryodhan wants that the Kauravas fight with all these brave men, then it is fine, this will fulfill all the wishes of the Pandavas. You should not try to make a treaty or get half the kingdom for the benefit of the Pandavas only. In that case, if you think it is appropriate, then tell him - 'Duryodhan! You should enter the battlefield.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)