पितामहोऽस्मि स्थविर: पिता पुत्रश्च भारत।
ममैव यूयमात्मस्था न मे यूयं न वो वयम्॥ २९॥
अनुवाद
हे भरत! मैं तुम्हारा बूढ़ा पितामह, पिता और पुत्र भी हूँ। तुम सब मेरी आत्मा में स्थित हो, फिर भी (वास्तव में) न तुम हमारे हो और न हम तुम्हारे हैं।
O Bharata! I am your old grandfather, father and son as well. All of you are situated in my soul, yet (in reality) neither you are ours nor we are yours.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥