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mahabharat 5.46.12: हम भिन्न-भिन्न वस्तुओं के नाम नहीं बता सकते। केवल इतना समझ लो कि सब कुछ उस परम पुरुष से ही प्रकट हुआ है। योगीजन उस सनातन परमेश्वर का अनुभव करते हैं॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.46.12 
सर्वमेव ततो विद्यात् तत् तद् वक्तुं न शक्नुम:।
योगिनस्तं प्रपश्यन्ति भगवन्तं सनातनम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हम भिन्न-भिन्न वस्तुओं के नाम नहीं बता सकते। केवल इतना समझ लो कि सब कुछ उस परम पुरुष से ही प्रकट हुआ है। योगीजन उस सनातन परमेश्वर का अनुभव करते हैं॥12॥
 
We are unable to name the different things. Just understand that everything has appeared from that Supreme Being. Yogis experience that eternal God.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)