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mahabharat 5.44.8: यद्यपि माता और पिता दोनों ही इस शरीर को जन्म देते हैं, तथापि आचार्य के उपदेश से जो जन्म प्राप्त होता है, वह परम पवित्र और अमर है ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.44: ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 44: ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.44.8 
शरीरमेतौ कुरुत: पिता माता च भारत।
आचार्यशास्ता या जाति: सा पुण्या साजरामरा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि माता और पिता दोनों ही इस शरीर को जन्म देते हैं, तथापि आचार्य के उपदेश से जो जन्म प्राप्त होता है, वह परम पवित्र और अमर है ॥8॥
 
India Although mother and father both give birth to this body, yet the birth that is achieved through the teachings of Acharya is most sacred and immortal. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)