Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.44.16: मनुष्य सनातनी विद्या और उसके सार का कुछ भाग काल के संयोग से, कुछ भाग गुरु के साथ सम्बन्ध से, कुछ भाग उसके उत्साह के साथ सम्बन्ध से तथा कुछ भाग शास्त्रों के परस्पर विचार से प्राप्त करता है ॥16॥ | mahabharat अध्याय 5.44: ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कालेन पादं लभते तथार्थं
ततश्च पादं गुरुयोगतश्च।
उत्साहयोगेन च पादमृच्छे-
च्छास्त्रेण पादं च ततोऽभियाति॥ १६॥
अनुवाद
मनुष्य सनातनी विद्या और उसके सार का कुछ भाग काल के संयोग से, कुछ भाग गुरु के साथ सम्बन्ध से, कुछ भाग उसके उत्साह के साथ सम्बन्ध से तथा कुछ भाग शास्त्रों के परस्पर विचार से प्राप्त करता है ॥16॥
Man acquires some parts of Sanatani Vidya and its essence through the combination of time, some part from the relationship with the Guru, some part from the relationship with his enthusiasm and some part from mutual consideration of the scriptures. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥