श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.43.6 
धृतराष्ट्र उवाच
न चेद् वेदा विना धर्मं त्रातुं शक्ता विचक्षण।
अथ कस्मात् प्रलापोऽयं ब्राह्मणानां सनातन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - विद्वान् ! यदि वेद धर्म के बिना रक्षा करने में समर्थ नहीं हैं, तो वेद-ज्ञानी ब्राह्मणों की पवित्रता की निन्दा दीर्घकाल तक क्यों चलती रहती है ? 6॥
 
Dhritarashtra said – Scholar! If the Vedas are not capable of protecting without religion, then why does the blasphemy about the purity of the Veda-knowing Brahmins continues for a long time? 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)