Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.43.55: जैसे दूसरे दिन चन्द्रमा की सूक्ष्म कलाओं को दिखाने के लिए वृक्ष की शाखा की ओर संकेत किया जाता है, वैसे ही ईश्वर के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराने के लिए वेदों का प्रयोग किया जाता है; ऐसा विद्वान पुरुष मानते हैं ॥ 55॥ | mahabharat अध्याय 5.43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धामांशभागस्य तथा हि वेदा
यथा च शाखा हि महीरुहस्य।
संवेदने चैव यथाऽऽमनन्ति
तस्मिन् हि सत्ये परमात्मनोऽर्थे॥ ५५॥
अनुवाद
जैसे दूसरे दिन चन्द्रमा की सूक्ष्म कलाओं को दिखाने के लिए वृक्ष की शाखा की ओर संकेत किया जाता है, वैसे ही ईश्वर के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराने के लिए वेदों का प्रयोग किया जाता है; ऐसा विद्वान पुरुष मानते हैं ॥ 55॥
Just as a branch of a tree is pointed out to show the subtle phases of the moon on the second day, similarly the Vedas are used to give knowledge of the true form of God; this is what learned men believe. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥