सनत्सुजात उवाच
नैनं सामान्यृचो वापि न यजूंष्यविचक्षणम्।
त्रायन्ते कर्मण: पापान्न ते मिथ्या ब्रवीम्यहम्॥ ४॥
अनुवाद
सनत्सुजात बोले - हे राजन! मैं आपसे झूठ नहीं कह रहा हूँ; न तो ऋग्वेद, न सामवेद, न यजुर्वेद ही अज्ञानी पापी को उसके पापकर्मों से बचा सकते हैं॥4॥
Sanatsujata said - O King, I am not telling you a lie; neither the Rig Veda, nor the Sama Veda, nor the Yajur Veda can protect an ignorant sinner from his sinful deeds. ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥