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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण
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श्लोक 3
श्लोक
5.43.3
धृतराष्ट्र उवाच
ऋचो यजूंषि यो वेद सामवेदं च वेद य:।
पापानि कुर्वन् पापेन लिप्यते किं न लिप्यते॥ ३॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - विद्वान्! जो मनुष्य ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद को जानता है और फिर भी पाप करता है, तो क्या वह उस पाप से प्रभावित होता है या नहीं?॥3॥
Dhritarashtra said - Scholar! One who knows the Rigveda, Yajurveda and Samveda and yet commits a sin, is he affected by that sin or not?॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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