Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.41.8: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् विदुरजी ने उन सनातन ऋषियों का स्मरण किया जो परम भक्त थे। यह जानकर कि विदुरजी उनका स्मरण कर रहे हैं, उन्होंने भी प्रत्यक्ष दर्शन दिया। | mahabharat अध्याय 5.41: विदुरजीके द्वारा स्मरण करनेपर आये हुए सनत्सुजात ऋषिसे धृतराष्ट्रको उपदेश देनेके लिये उनकी प्रार्थना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
चिन्तयामास विदुरस्तमृषिं शंसितव्रतम्।
स च तच्चिन्तितं ज्ञात्वा दर्शयामास भारत॥ ८॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् विदुरजी ने उन सनातन ऋषियों का स्मरण किया जो परम भक्त थे। यह जानकर कि विदुरजी उनका स्मरण कर रहे हैं, उन्होंने भी प्रत्यक्ष दर्शन दिया।
Vaishampayana says - O King! Thereafter Vidurji remembered those eternal sages who were great devotees. Knowing that Vidur was remembering him, he too gave a direct darshan. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥