श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.40.9 
अजाश्च कांस्यं रजतं च नित्यं
मध्वाकर्ष: शकुनि: श्रोत्रियश्च।
वृद्धो ज्ञातिरवसन्न: कुलीन
एतानि ते सन्तु गृहे सदैव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
बकरे, कांसे के बर्तन, चाँदी, शहद, धनुष, पक्षी, वेदों में पारंगत ब्राह्मण, वृद्ध बंधु और संकटग्रस्त कुलीन पुरुष - ये सब तुम्हारे घर में सदैव उपस्थित रहें॥9॥
 
Goats, bronze vessels, silver, honey, bows, birds, a Brahmin well versed in the Vedas, an old relative and a noble man in distress - may all of these always be present in your house.॥ 9॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas