श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.40.31 
सा तु बुद्धि: कृताप्येवं पाण्डवान् प्रति मे सदा।
दुर्योधनं समासाद्य पुनर्विपरिवर्तते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि मैं पाण्डवों के प्रति सदैव ऐसे ही विचार रखता हूँ, तथापि दुर्योधन से मिलकर मेरे विचार पुनः बदल जाते हैं ॥31॥
 
Though I always maintain such thoughts towards the Pandavas, yet after meeting Duryodhana my thoughts change again. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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