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श्लोक 5.40.20  |
इदं वच: शक्ष्यसि चेद् यथाव-
न्निशम्य सर्वं प्रतिपत्तुमेव।
यश: परं प्राप्स्यसि जीवलोके
भयं न चामुत्र न चेह तेऽस्ति॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| यदि तुम मेरी कही हुई बात को ठीक-ठीक समझ सकोगे तो इस मनुष्य लोक में महान यश प्राप्त करोगे और तुम्हें इस लोक और परलोक में कोई भय नहीं रहेगा ॥20॥ |
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| If you are able to understand correctly what I have said then you will achieve great fame in this human world and you will have no fear in this world or the next. ॥20॥ |
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