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श्लोक 5.39.85  |
राजन् भूयो ब्रवीमि त्वां पुत्रेषु सममाचर।
समता यदि ते राजन् स्वेषु पाण्डुसुतेषु वा॥ ८५॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! मैं फिर कहता हूँ कि यदि आप अपने पुत्रों और पाण्डवों के प्रति समान श्रद्धा रखते हैं, तो सबके साथ समान व्यवहार कीजिए॥85॥ |
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| O King! I say again, if you have equal respect for your sons and the Pandavas, then treat all of them equally. ॥ 85॥ |
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इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि प्रजागरपर्वणि विदुरवाक्ये एकोनचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत प्रजागरपर्वमें विदुरवाक्यविषयक उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३९॥
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