| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश » श्लोक 80 |
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| | | | श्लोक 5.39.80  | सुवर्णस्य मलं रूप्यं रूप्यस्यापि मलं त्रपु।
ज्ञेयं त्रपुमलं सीसं सीसस्यापि मलं मलम्॥ ८०॥ | | | | | | अनुवाद | | सोने की अशुद्धता चाँदी है, चाँदी की अशुद्धता टिन है, टिन की अशुद्धता सीसा है और सीसे की अशुद्धता गंदगी है। 80. | | | | The impurity of gold is silver, the impurity of silver is tin, the impurity of tin is lead and the impurity of lead is filthiness. 80. | | ✨ ai-generated | | |
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