श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  5.39.73 
स्त्रीधूर्तकेऽलसे भीरौ चण्डे पुरुषमानिनि।
चौरे कृतघ्ने विश्वासो न कार्यो न च नास्तिके॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
परस्त्रीगामी, आलसी, कायर, क्रोधी, पुरुषत्व का अभिमानी, चोर, कृतघ्न और नास्तिक का विश्वास नहीं करना चाहिए ॥73॥
 
A womanizer, lazy, coward, angry, proud of manhood, thief, ungrateful and atheist should not be trusted. 73॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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