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mahabharat 5.39.6: जो विकास भविष्य में विनाश का कारण बन सकता है, उसे अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए तथा जो पतन भविष्य में प्रगति का कारण बन सकता है, उसका भी सम्मान किया जाना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.39.6 
न वृद्धिर्बहु मन्तव्या या वृद्धि: क्षयमावहेत्।
क्षयोऽपि बहु मन्तव्यो य: क्षयो वृद्धिमावहेत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो विकास भविष्य में विनाश का कारण बन सकता है, उसे अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए तथा जो पतन भविष्य में प्रगति का कारण बन सकता है, उसका भी सम्मान किया जाना चाहिए।
 
The growth that may lead to destruction in the future should not be given much importance and the decay that may lead to progress in the future should also be respected.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)