श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.39.41 
मत्या परीक्ष्य मेधावी बुद्धॺा सम्पाद्य चासकृत्।
श्रुत्वा दृष्ट्वाथ विज्ञाय प्राज्ञैर्मैत्रीं समाचरेत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि वह अपने अनुभव से बार-बार किसी व्यक्ति का मूल्य निश्चित करे और दूसरों से सुनकर तथा स्वयं देखकर, विचार करके विद्वानों से मित्रता करे ॥ 41॥
 
A wise man should repeatedly ascertain the worth of a person by his own experience and after hearing from others and seeing for himself, he should make friends with learned persons after due deliberation. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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