श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.39.38 
द्वाराण्येतानि यो ज्ञात्वा संवृणोति सदा नृप।
त्रिवर्गाचरणे युक्त: स शत्रूनधितिष्ठति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य इन द्वारों को जानकर इन्हें सदैव बंद रखता है, वह धन, धर्म और काम के भोग में लगा रहता है और अपने शत्रुओं को वश में कर लेता है ॥ 38॥
 
O King! He who, after knowing these doors, keeps them closed at all times, remains engaged in the enjoyment of wealth, virtue and sex, and subjugates his enemies. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)