श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.39.30 
न कश्चिन्नापनयते पुमानन्यत्र भार्गवात्।
शेषसम्प्रतिपत्तिस्तु बुद्धिमत्स्वेव तिष्ठति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य के अतिरिक्त ऐसा कोई दूसरा पुरुष नहीं है जो नीति का उल्लंघन न करता हो; अतः जो बीत गया सो बीत गया; शेष कर्तव्यों का विचार तो (आप जैसे) बुद्धिमान पुरुषों को ही करना है ॥30॥
 
Apart from Shukracharya, there is no other person who does not violate ethics; therefore, what is past is past; the consideration of the remaining duties is up to wise men (like you) only. ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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