vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश
»
श्लोक 29
श्लोक
5.39.29
येन खट्वां समारूढ: परितप्येत कर्मणा।
आदावेव न तत् कुर्यादध्रुवे जीविते सति॥ २९॥
अनुवाद
इस जीवन में कुछ निश्चय नहीं है, इसलिए जो कर्म अन्त में खाट पर पछताना पड़े, उसे पहले से नहीं करना चाहिए ॥29॥
There is no certainty in this life, therefore, the act which will make you repent on a cot in the end, should not be done in advance. ॥ 29॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas