श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.39.29 
येन खट्वां समारूढ: परितप्येत कर्मणा।
आदावेव न तत् कुर्यादध्रुवे जीविते सति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस जीवन में कुछ निश्चय नहीं है, इसलिए जो कर्म अन्त में खाट पर पछताना पड़े, उसे पहले से नहीं करना चाहिए ॥29॥
 
There is no certainty in this life, therefore, the act which will make you repent on a cot in the end, should not be done in advance. ॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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