श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.39.28 
पश्चादपि नरश्रेष्ठ तव तापो भविष्यति।
तान् वा हतान् सुतान् वापि श्रुत्वा तदनुचिन्तय॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! जब तुम पाण्डवों अथवा अपने पुत्रों के मारे जाने का समाचार सुनोगे, तो तुम्हें बहुत दुःख होगा; अतः पहले ही इस विषय में सोच लो।
 
O best of men! You will be saddened later on when you hear that the Pandavas or your sons have been killed; therefore, think about this beforehand. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)