Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.39.27: जैसे हाथ में विषैला बाण लेकर शिकारी के पास पहुँचने पर हिरण को कष्ट सहना पड़ता है, वैसे ही धनवान बंधु के पास पहुँचने पर कष्ट सहने वाला समान जाति का मनुष्य उसके पापों का भागी बनता है॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमन्तं ज्ञातिमासाद्य यो ज्ञातिरवसीदति।
दिग्धहस्तं मृग इव स एनस्तस्य विन्दति॥ २७॥
अनुवाद
जैसे हाथ में विषैला बाण लेकर शिकारी के पास पहुँचने पर हिरण को कष्ट सहना पड़ता है, वैसे ही धनवान बंधु के पास पहुँचने पर कष्ट सहने वाला समान जाति का मनुष्य उसके पापों का भागी बनता है॥ 27॥
Just as a deer has to suffer pain on reaching a hunter with a poisonous arrow in his hand, similarly a person belonging to the same caste who is suffering on reaching a rich relative, becomes a sharer in his sins.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥