श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.39.10 
विदुर उवाच
अतीवगुणसम्पन्नो न जातु विनयान्वित:।
सुसूक्ष्ममपि भूतानामुपमर्दमुपेक्षते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले - हे राजन! जो बहुत से गुणों से संपन्न और विनम्र है, वह जीवों की किंचित् मात्र भी हत्या करने से कभी नहीं चूक सकता॥ 10॥
 
Vidur ji said - O King! One who is blessed with many virtues and is humble can never ignore even the slightest killing of living beings.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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