यं प्रशंसन्ति कितवा यं प्रशंसन्ति चारणा:।
यं प्रशंसन्ति बन्धक्यो न स जीवति मानव:॥ ४५॥
अनुवाद
(केवल) वह मनुष्य जिसकी प्रशंसा जुआरी करते हैं, नर्तकियाँ जिसका गुणगान करती हैं और वेश्याएँ जिसका गुणगान करती हैं, वह जीवित रहते हुए भी मृतक के समान है ॥ 45॥
(Only) the man whom gamblers praise, whose praises dancers sing and whose glories prostitutes extol, is like a dead man while alive. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥