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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश
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श्लोक 28
श्लोक
5.38.28
ब्राह्मणं ब्राह्मणो वेद भर्ता वेद स्त्रियं तथा।
अमात्यं नृपतिर्वेद राजा राजानमेव च॥ २८॥
अनुवाद
ब्राह्मण ही ब्राह्मण को जानता है, स्त्री ही अपने पति को जानती है, मंत्री ही राजा को जानता है और राजा ही राजा को जानता है ॥28॥
A brahmin knows a brahmin, a woman knows her husband, a minister knows a king and only a king knows a king.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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