श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.38.23 
कर्मणां तु प्रशस्तानामनुष्ठानं सुखावहम्।
तेषामेवाननुष्ठानं पश्चात्तापकरं मतम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अच्छे कर्म करने से सुख मिलता है, परन्तु यदि वे न किए जाएँ तो पश्चाताप का कारण माने जाते हैं ॥23॥
 
Performing good deeds brings happiness, but if they are not performed then it is considered to be the cause of repentance. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)