श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.38.22 
अप्रशस्तानि कार्याणि यो मोहादनुतिष्ठति।
स तेषां विपरिभ्रंशाद् भ्रंश्यते जीवितादपि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य मोहवश होकर बुरे कर्म (शास्त्रविरुद्ध) करता है, वह उन कर्मों के दुष्परिणामों के कारण अपने प्राण खो देता है ॥22॥
 
One who, out of delusion, performs evil deeds (prohibited by scriptures), loses his life due to the adverse consequences of those deeds. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)