श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  5.38.17-18h 
गिरिपृष्ठमुपारुह्य प्रासादं वा रहोगत:॥ १७॥
अरण्ये नि:शलाके वा तत्र मन्त्रोऽभिधीयते।
 
 
अनुवाद
किसी पर्वत शिखर या राजमहल पर चढ़कर, किसी एकांत स्थान पर जाकर, किसी वन में बैठकर अथवा घास आदि से ढके स्थान पर मंत्र जप करना चाहिए ॥17 1/2॥
 
One should climb a mountain top or a royal palace, go to a secluded spot, or sit in a forest or do the Mantra mantra at a place covered with grass etc. ॥17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)