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mahabharat 5.36.62: यदि वृक्ष अकेला हो, तो चाहे वह कितना ही मजबूत हो, उसकी जड़ें मजबूत हों और वह बहुत बड़ा हो, तो भी तूफान उसे एक ही क्षण में उसकी शाखाओं सहित उखाड़ सकता है।   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.36.62 
महानप्येकजो वृक्षो बलवान‍् सुप्रतिष्ठित:।
प्रसह्य एव वातेन सस्कन्धो मर्दितुं क्षणात्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
यदि वृक्ष अकेला हो, तो चाहे वह कितना ही मजबूत हो, उसकी जड़ें मजबूत हों और वह बहुत बड़ा हो, तो भी तूफान उसे एक ही क्षण में उसकी शाखाओं सहित उखाड़ सकता है।
 
If the tree is alone, even if it is strong, has strong roots and is very large, it can be forcefully uprooted along with its branches in a single moment by a storm. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)