Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.36.57: यदि उनसे कोई हितकारी बात भी कही जाए, तो भी वे उसे पसंद नहीं करते। उनका कल्याण भी नहीं हो सकता। हे राजन! विवेकहीन मनुष्यों के लिए विनाश के अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं है ॥57॥ | mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वै तेषां स्वदते पथ्यमुक्तं
योगक्षेमं कल्पते नैव तेषाम्।
भिन्नानां वै मनुजेन्द्र परायणं
न विद्यते किंचिदन्यद् विनाशात्॥ ५७॥
अनुवाद
यदि उनसे कोई हितकारी बात भी कही जाए, तो भी वे उसे पसंद नहीं करते। उनका कल्याण भी नहीं हो सकता। हे राजन! विवेकहीन मनुष्यों के लिए विनाश के अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं है ॥57॥
Even if something beneficial is said to them, they do not like it. Even their welfare cannot be achieved. O King! There is no other way for people who discriminate except destruction. ॥ 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥