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mahabharat 5.36.55: हे राजन! जो लोग आपस में ही विभक्त रहते हैं, वे अच्छे बिस्तरों वाले बिस्तर होने पर भी चैन से नहीं सो सकते; वे स्त्रियों के साथ रहने पर भी, रथियों और मागधों की प्रशंसा सुनने पर भी सुखी नहीं होते।   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  5.36.55 
स्वास्तीर्णानि शयनानि प्रपन्ना
न वै भिन्ना जातु निद्रां लभन्ते।
न स्त्रीषु राजन् रतिमाप्नुवन्ति
न मागधै: स्तूयमाना न सूतै:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो लोग आपस में ही विभक्त रहते हैं, वे अच्छे बिस्तरों वाले बिस्तर होने पर भी चैन से नहीं सो सकते; वे स्त्रियों के साथ रहने पर भी, रथियों और मागधों की प्रशंसा सुनने पर भी सुखी नहीं होते।
 
O King! Those who are divided among themselves cannot sleep peacefully even if they have beds with good beddings; they do not feel happy even after staying in the company of women or listening to the praises of the charioteers and Magadhas. 55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)