|
| |
| |
श्लोक 5.36.52  |
बुद्धॺा भयं प्रणुदति तपसा विन्दते महत्।
गुरुशुश्रूषया ज्ञानं शान्तिं योगेन विन्दति॥ ५२॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| बुद्धि से मनुष्य भय दूर करता है, तप से महान पद प्राप्त करता है, गुरु के उपदेश से ज्ञान प्राप्त करता है और योग से शांति प्राप्त करता है ॥52॥ |
| |
| Through wisdom a man removes his fears, through penance he attains great status, through the teachings of his Guru he attains knowledge and through yoga he attains peace. 52॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|