श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.36.52 
बुद्धॺा भयं प्रणुदति तपसा विन्दते महत्।
गुरुशुश्रूषया ज्ञानं शान्तिं योगेन विन्दति॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि से मनुष्य भय दूर करता है, तप से महान पद प्राप्त करता है, गुरु के उपदेश से ज्ञान प्राप्त करता है और योग से शांति प्राप्त करता है ॥52॥
 
Through wisdom a man removes his fears, through penance he attains great status, through the teachings of his Guru he attains knowledge and through yoga he attains peace. 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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