श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.36.44 
संतापाद् भ्रश्यते रूपं संतापाद् भ्रश्यते बलम्।
संतापाद् भ्रश्यते ज्ञानं संतापाद् व्याधिमृच्छति॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
शोक से ही सौन्दर्य नष्ट होता है, शोक से ही बल नष्ट होता है, शोक से ही ज्ञान नष्ट होता है और शोक से ही मनुष्य रोग को प्राप्त होता है ॥44॥
 
Due to grief, beauty is destroyed, due to grief, strength is destroyed, due to grief, knowledge is destroyed and due to grief, a man gets disease. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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