Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.36.40: जैसे हंस सूखे सरोवर के ऊपर मंडराते रहते हैं और उसमें प्रवेश नहीं करते, वैसे ही जिसका मन चंचल है, जो अज्ञानी है और इन्द्रियों का दास है, वह मनुष्य जीवन का अर्थ त्याग देता है ॥40॥ | mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे हंस सूखे सरोवर के ऊपर मंडराते रहते हैं और उसमें प्रवेश नहीं करते, वैसे ही जिसका मन चंचल है, जो अज्ञानी है और इन्द्रियों का दास है, वह मनुष्य जीवन का अर्थ त्याग देता है ॥40॥
Just as swans hover over a dry lake and do not enter it, similarly, a person whose mind is restless, who is ignorant and a slave to the senses, abandons the meaning of life. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥