श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.36.38 
य: कश्चिदप्यसम्बद्धो मित्रभावेन वर्तते।
स एव बन्धुस्तन्मित्रं सा गतिस्तत् परायणम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो पूर्व सम्बन्ध न होने पर भी मैत्रीभाव रखता है, वही मित्र, सखा, आधार और आश्रय है ॥38॥
 
He who shows friendship even when there is no prior relationship, is the friend, the friend, the support and the shelter. ॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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